श्री देवी असहाय सेवा संसथान

 संस्था सन १९९२ से निर्धन एवं असहाय लोगों की मदद के लिए निरंतर प्रयत्नशील एवं दृढ़ संकल्पित है | 'नर सेवा ही नारायण सेवा है' संस्था का मुख्य संकल्प है बिना किसी भेदभाव के गरीब बेसहारा लोगों को निरंतर चिकित्सा ,शिक्षा,पेयजल,भोजन व वस्त्रादि की व्यवस्था तथा गौ-सेवा ,पशु पक्षी सेवा के साथ साथ ब्रजमंडल की संस्कृतिक एवं एतिहासिक धरोहर तथा पर्यावरण सुरक्षा हेतु जनसमूह को जाग्रत करना संस्था के मुख्य उद्देश्य हैं|

संस्था द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली से लगभग 1 किमी. दूरी पर मथुरा परिक्रमा मार्ग में पुराणप्रशिद्ध श्रीकृष्ण की पावन पवित्र क्रीडा-भूमि सरस्वती कुंद के अति नजदीक सुरम्य स्थान पर योग साधना एवं गरीब बेसहारा लोगों की सहायतार्थ एक संसथान की आश्रम के रूप में स्थापना करने के उद्देश्य से जून 1997 में परम श्रद्धेय स्व.श्री निहाल सिंह द्वारा आश्रम की आधारशिला रखी गई ,जहाँ का वातावरण अत्यन सुरम्य ,मनोहारी एवं चतुर्दिक वृक्षों से आच्छादित है तथा यह सिद्धपीठ तपोस्थली है जिसका नाम 'श्रीदेवी असहाय सेवा संस्थान' रखा गया है | यहाँ पर व्यक्ति एकाग्रचित होकर उस अलौकिक प्रेम को पाने के लिए लालायित हो उठता है | उक्त सिद्धपीठ संस्थान का निर्माण भगवती द्वारा नियुक्त पुत्र श्री निहाल सिंह द्वारा संस्था के भवन एवं मंदिर निर्माण कार्य अनवरत कराया जा रहा था कि मार्गशीष कृष्ण एकादशी संवत् 2060 ,दिनांक 20.11.2003 को अचानक ह्रदयगति रुक जाने से शरीर छोड़कर ब्रह्मलीन हो गये | इसके बाद श्री निहाल सिंह जी के ज्येष्ठ पुत्र सुरेशचंद्र कुशवाह ने सह संस्थापक के रूप में अपने पिता के सत्संकल्पानुसार संस्थान के भवन एवं मंदिर के निर्माण को पूरा कराकर मंदिर में साम्ब सदाशिव श्रीसुरेश्वर महादेव ,महाबली वीर हनुमान के साथ सर्व्शाक्तिस्वरूपिनि ,कष्टहारिणी करुणामयी माँ ब्रजेश्वरी श्रीसुरेश्वरी देवी जी की प्राण प्रतिष्ठा माघ कृष्ण त्रयोदशी संवत् 2062 तदनुसार दिनांक 27.01.06. को वेदोक्त विधि-विधान के साथ श्री श्री कात्यायनी पीठाधीश्वर अनंतश्रीविभूषित पूज्य्पादस्वामी श्रीविध्यानान्दजी महाराज ,श्री धाम वृन्दावन एवं परम श्रद्धेय पूज्यपाद स्वामी श्रीमाहेशानंदजी महाराज, श्री अखंडानन्द आश्रम, वृन्दावन के संयुक्त तत्वाधान में कराया गया है जहाँ पर माँ ब्रजेश्वरी श्रीसुरेश्वरीदेवी अपनी अलौकिकता को लिए संसथान के मंदिर में विराजमान हैं ,जहाँ पर नित्य नियमित समयोचित पूजा महोत्सव अनवरत् रूप से विधिपूर्वक होते रहते हैं |