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सभी देवता जिसके शारीर में निवास करते हैं एवं जिसकी कृपा से धर्म ,अर्थ ,काम ,मोक्ष की मनुष्य को प्राप्ति होती हैं | ऐसी गाय की महिमा,ब्रम्हवैवर्त पुराण ,ऋग्वेद ,यजुर्वेद ,अथर्ववेद ,ब्रह्त्पराशर,स्कंध पुराण एवं महाभारत जैसे अनेकानेक ग्रंथो में वर्णित है | गोमाता हमें बल, बुद्धि ,आयु ,आरोग्य ,सुख ,समृद्धि ,ऐश्वर्य एवं कीर्ति प्रदान करती हैं | जो मनुष्य अनुभव करते हैं वे माता कहते हैं और गौ उन्हें पुत्रवत प्रेम करती हैं | माता की सेवा एवं रक्षा करना पुत्र का कर्तव्य है और पुत्र को जीवन देना माता का कर्तव्य है | चाहे धर्म का युग हो या विज्ञान का युग हो , पुत्र माता से प्रेम करे या कष्ट दे परन्तु माता तो पुत्रों से प्रेम करती है | गौमाता हमें दूध ,दही एवं घी के रूप में अमृत प्रदान करती है एवं मूत्र एवं गोबर के रूप में ओषधियाँ ,खाद एवं कीटनियंत्रक देती है| गौमाता अपनी संतान ( बैल ) को हमें खेती के लिए साधन के रूप में देती हैं ,श्वास -उच्छास से बयुमण्डल को शुद्ध करती है तथा चरण स्पर्श से रजकण शक्तिमान बनाती है ,साथ ही दूध ,दही ,घी ,मूत्र एवं गोबर आदि को मिलाकर एक अदभुत एवं सर्वशक्तिमान रसायन देती है जिसे पंचगब्य कहते हैं | जो मनुष्य के लिए "प्राण" हैं | गौमाता के पंचगव्य का वर्णन चरक सहिंता ,सारंगधर संहिता ,भावप्रकाश संहिता ,सुश्रत् संहिता ,अष्टांग हृदय ,राजनिघंटु ,धनवंतरी निघंटु ,योग रत्नाकर इत्यादि में स्पष्ट रूप से किया गया है | इन ग्रंथों के आधार पर गौ पंचगब्य के नियमित प्रयोग से पैरालइसिस ( पक्षाघात ) ,ब्लडकैंसर ,किसी भी तरह का सदमा ,याददाश्त चली जाना ,नरवस सिस्टम का काम ना करना ,हाथ-पैरो में सुन्नपन ,चलते -चलते गिर जाना ( चक्कर आना ),एसीडिटी ,नाक से किसी गंध का ना आना ,नींद कम या ना आना ,घुटने एवं कमर में दर्द ,पेट में अल्सर ,लीवर की परेशानी ,कब्ज ,गैस ,अस्थमा ,ऐलर्जी ,साइनस ,सिरदर्द ,तनाव ,आखों में जलन,कान में दर्द ,कान के पर्दे में परेशानी ,भुलक्कडपन,ब्लडप्रैसर ,मधुमेह ,मोटापा ,पीलिया ( जोइन्टिस ),किसी तरह का प्रमेह ,लिकोरिया ,बाल गिरना ,आंखों में चुभन ,दाद ,खुजली एवं मोतियाविन्द जैसी असाध्य बीमारियों का निदान बहुत कम खर्चे में आसानी से किया जा सकता है | आपसे निवेदन है कि गौमाता की रक्षा एवं सेवा में सहयोग कर पुण्य के भागी बनें तथा उपरोक्त रोगों के निदान हेतु सम्पर्क करें |